विवेकानंद ने जीवन में सुरक्षित राह पर चलने की नहीं बल्कि जोखिम उठाने की सीख दी। 

क्योंकि उनका मानना था कि अगर आप जीते तो आप संचालन करेंगे और अगर हारे तो मार्गदर्शन।



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