मजदूर –और भारत के महान पत्रकार सन २०२० जब से कोरोना काल शुरू हुआ है तब से मजदूरो का पलायन एक देशव्यापी समस्या बन गई हैl एक पत्रकार महोदय इस पलायन से इतने द्रवित हुए की वो घर निकल कर अपना कैमरा लेकर सड़क पर उतर गए और उनके वीडियो शूट करके सोशल मीडिया पर डालने लगे l देखा जाए तो इसमें बिलकुल कुछ गलत नहीं था ये एक स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया थी l अब समस्या कहा से उत्त्पन्न होती है की जब उन्होंने इसे एक सवाल के रूप में उठाना शुरू कर दिया तब कोई दिक्कत की बात नहीं थी l परन्तु जब एक पढ़ा लिखा व्यक्ति कोई सवाल, किसी व्यक्ति से या संस्था से पूछता है तो इतनी समझ की आवश्यकता पड़ती है की वो सवाल सही संस्था से पूछे, ये नहीं की, जिम्मेदारी किसी एक्स व्यक्ति की है और सवाल किसी वाई व्यक्ति से पूछा जाएl इस प्रकार सवाल पूछने वाली की मंशा पर ही शक गहरा जाता है की सवाल खड़ा करने वाले पत्रकार की मंशा साफ़ नहीं है और न ही उसकी नियत ठीक है l बल्कि वो किसी की परेशानी, दुःख दर्द को अपने कैरियर को चमकाने के लिए उपयोग कर रहे है l भारत का दुर्भाग्य यही है की यहाँ का चौथा खम्भा अपनी जिम्मेदारियों से भागता नजर ...
Posts
- Get link
- X
- Other Apps
शब्दों का खेल से हिंसा का तांडव इससे वोट बैंक की खेती किसी भी बिल को या कानून को पढ़ते वक्त, उसके उद्देश्यों को समझना उतना ही जरुरी है जितना उस कानून को पढना, सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक निर्णय में पढ़ते वक्त सविंधान की प्रस्तावना को सविंधान के प्रावधानों के साथ पढना अति आवश्यक है. इसीलिए नागरिक संशोधन बिल के उद्देश्यों को पढना भी उतना ही जरुरी है की आखिर ये कानून १. करेगा क्या, २. किसको नुक्सान पहुचायेगा ३. किसके अधिकार कम करेगा ४. किसके बढ़ा देगा ५. धर्मनिरपेक्षता का ताना बाना तोड़ देगा ६. सविधान पर क्या असर होगा परन्तु इस देश के नेता, पत्रकार बुद्धिजीवी, सामान्य नागरिक, इन सबको पढना ही नहीं चाहते है बल्कि अपने वोट बैंक के लिए भावनाओं को भड़का कर अपनी सत्ता की रोटी सेकना चाहते है. पत्रकार अपने आकाओ को खुश करने के लिए व्यर्थ की व्याखाए कर रहे है. बुद्धिजीवी अपने पुरूस्कार के लिए अपने आका को खुश कर रहे है...
- Get link
- X
- Other Apps
The Indian Politics Why study of politics required…. During the study of political science, I found a great book on subject of political science which is written by R. N. Gilchrist namely “Principles Of Political Science”. I observed that the maximum portion of this book according to Manu and Kauṭilya. Therefore this book should be read by every Indians either he is common man or politician. Meanwhile I read about J P Narayan who give the theory of seven revolution for develop and established a state for the welfare of peoples includes 1. Politics, 2. Economics, 3. Society, 4. Cultural, 5. Intellectual, 6. Education, 7. Religious education. J P Narayan was more fair and correct on this point that a country should take remarkable actions to become a socialist society where all peoples live together and enjoy all resources jointly. Even Gandhi was not clear on this point that how a state may attain “Ram Rajya” according to his theory. In other words it can be say tha...
- Get link
- X
- Other Apps
"पन्थनिरपेक्ष" संविधान ( 45 वां संशोधन ) विधेयक में यह निर्धारित करने का प्रयास किया गया था कि संविधान के पंथनिरपेक्ष तथा लोकतंत्रात्मक स्वरूप को संविधान की एक बुनियादी विशेषता माना जाएगा . The Constitution (45th Amendment) Bill sought to lay down that secular and democratic character of the Constitution would be regarded as being among the basic features of the Constitution. केशवानन्द भारती तथा मिनरवा के मामलों में पंथनिरपेक्षता को एक बुनियादी विशेषता बताया गया . In the Kesavananda Bharti and Minerva Mills cases, secularism came to be mentioned as a basic feature. न्यायमूर्ति रामास्वामी के अनुसार लोकतांत्रिकशासन व्यवस्था , संघीय ढांचा , राष्ट्र की एकता और अखंडता , पंथनिरपेक्षता , समाजवाद , सामाजिक न्याय तथा न्यायिक पुनरीक्षणसंविधान के मूल लक्षणों में हैं . Justice Ramaswamy held that a democratic form of Government, federal structure, unity and integrity of the nation , secularism , socialism , social justice and judicial review were among the basic features...