शब्दों का खेल से हिंसा का तांडव इससे वोट बैंक की खेती किसी भी बिल को या कानून को पढ़ते वक्त, उसके उद्देश्यों को समझना उतना ही जरुरी है जितना उस कानून को पढना, सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक निर्णय में पढ़ते वक्त सविंधान की प्रस्तावना को सविंधान के प्रावधानों के साथ पढना अति आवश्यक है. इसीलिए नागरिक संशोधन बिल के उद्देश्यों को पढना भी उतना ही जरुरी है की आखिर ये कानून १. करेगा क्या, २. किसको नुक्सान पहुचायेगा ३. किसके अधिकार कम करेगा ४. किसके बढ़ा देगा ५. धर्मनिरपेक्षता का ताना बाना तोड़ देगा ६. सविधान पर क्या असर होगा परन्तु इस देश के नेता, पत्रकार बुद्धिजीवी, सामान्य नागरिक, इन सबको पढना ही नहीं चाहते है बल्कि अपने वोट बैंक के लिए भावनाओं को भड़का कर अपनी सत्ता की रोटी सेकना चाहते है. पत्रकार अपने आकाओ को खुश करने के लिए व्यर्थ की व्याखाए कर रहे है. बुद्धिजीवी अपने पुरूस्कार के लिए अपने आका को खुश कर रहे है...
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