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Showing posts from July, 2019
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The Indian Politics Why study of politics required…. During the study of political science, I found a great book on subject of political science which is written by R. N. Gilchrist namely “Principles Of Political Science”. I observed that the maximum portion of this book according to Manu and Kauṭilya. Therefore this book should be read by every Indians either he is common man or politician. Meanwhile I read about J P Narayan who give the theory of seven revolution for develop and established a state for the welfare of peoples includes 1. Politics, 2. Economics, 3. Society, 4. Cultural, 5. Intellectual,   6. Education, 7. Religious education. J P Narayan was more fair and correct on this point that a country should take remarkable actions to become a socialist society where all peoples live together and enjoy all resources jointly. Even Gandhi was not clear on this point that how a state may attain “Ram Rajya” according to his theory. In other words it can be say tha...
"पन्थनिरपेक्ष" संविधान ( 45 वां संशोधन ) विधेयक में यह निर्धारित करने का प्रयास किया गया था कि संविधान के पंथनिरपेक्ष तथा लोकतंत्रात्मक स्वरूप को संविधान की एक बुनियादी विशेषता माना जाएगा . The Constitution (45th Amendment) Bill sought to lay down that secular and democratic character of the Constitution would be regarded as being among the basic features of the Constitution. केशवानन्द भारती तथा मिनरवा के मामलों में पंथनिरपेक्षता को एक बुनियादी विशेषता बताया गया . In the Kesavananda Bharti and Minerva Mills cases, secularism came to be mentioned as a basic feature. न्यायमूर्ति रामास्वामी के अनुसार लोकतांत्रिकशासन व्यवस्था , संघीय ढांचा , राष्ट्र की एकता और अखंडता , पंथनिरपेक्षता , समाजवाद , सामाजिक न्याय तथा न्यायिक पुनरीक्षणसंविधान के मूल लक्षणों में हैं . Justice Ramaswamy held that a democratic form of Government, federal structure, unity and integrity of the nation , secularism , socialism , social justice and judicial review were among the basic features...
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एनार्किस्ट शब्द का हिंदी में मतलब है अराजकतावादी। यानी ऐसा शख्स जो अराजकता में विश्वास रखता हो। अराजकता का मतलब किसी भी राज्य की ऐसी स्थिति से है जहां नियम कानून या तो न हों या फिर ज्यादातर लोग उसकी पूरी तरह अनदेखी कर रहे हों। साथ ही ऐसे राज्य में हर व्यक्ति अपने हिसाब से कुछ भी करने के लिए आजाद हो। राजनीति शास्त्र में अराजकता का मतलब ऐसे स्थिति से है, जहां राज्य में कानून का राज न हो और नागरिक नि यम कानून या कानूनी बंदिशों का पालन न करें। चारों तरफ अव्यवस्था और मनमर्जी हो। हालांकि, कुछ जगहों पर 'एनार्की' शब्द का एक अर्थ ऐसी राज्य की ऐसी व्यवस्था भी होता है जहां कोई सरकार कायम न हो। लेकिन ऐसे राज्य में जरूरी नहीं है कि हिंसा या अव्यवस्था हो। अराजकता का एक अर्थ राज्य (सरकार) के बिना रहने वाला समाज भी है
अब हम आजाद है, अब हमें नया धर्म चाहये।। आजादी वाला धर्म।। जिसमे सब कुछ करने की आजादी हो।। कोई बंधन नही हो। सिर्फ आजादी हो। क्या समाज ऐसे धर्म के लिए तैयार है। सोचो खोजो प्रयोग करो धर्म बनाओ पालन करो, यही जीवन है।
भारत के न्याय मंत्रालय के पास इस बात की कोई जानकारी नही है कि भारत मे कुल कितने कानून लागू है। इस बारे में RTI में पूछे गए सवाल से ये पता चला है। बल्कि उसने RTI को ही वापिस कर दिया कि इसमें पूछे गए सवाल ही ठीक नही है।।
भारत मे तीन धर्म प्रचलित है एक जिसे प्रोफेट साहब ने चलाया, दूसरा जिसे इतिहासकारो ने चलाया, तीसरा जिसे इंदिरा गांधी ने चलाया।। इस्लाम, हिन्दू , सेक्युलर, यही तीन धर्म प्रचलन में है आजकल भारत मे।।
Mob Lynching shall be more dangerous than terrorism in future if it is not control now.. but politics, media and Justice administration is responsible for it. Like speech, fact less news, poor administration..
जब कानून सत्ता की रखैल बन कर रह जाएगा, उस अराजकता की स्थिति में भीड़ सड़को पर ही फैसला करने लगेगी।।
Major parties depend on giant media corporate for election companion the entire debate must be on cronyism vs corruption vs media-ism ..
विश्व की अब तक कि मोब लिंचिंग कश्मीर में हुई थी जिसमे लाखो पंडितो को मार मार कर बाहर भाग दिया था। लेकिन देश के किसी भी पत्रकार में इसके ऊपर लिखने की हिम्मत नही है।।
चरित्रहीन नेता अपने वोट बैंक को बचाने के लिए अब सिविल वॉर की धमकी देने पर उतारू हो गए है।। और चरित्र हीन पत्रकार विशेष समुदाय के अपराध को कुतर्कों से बचाने की कोशिश कर रहे है।। इन दोनों के लिए एक राज्य में कारित कृत्य दूसरे राज्य में मानवाधिकार बन जाता है।।
स्वतंत्र भारत में कांग्रेस का प्रथम “सरकार हटाओ आन्दोलन” १९५७ में केरल में विधान सभा के चुनाव हुए थे जिसमे कम्युनिस्ट पार्टी को १२६ में से ६० सीट हासिल हुई थी! इनको पांच स्वतंत्र विधायको का समर्थन प्राप्त था ! राज्यपाल ने कम्युनिस्ट दल के नेता ई एम् एस नम्बुदरीपाद को सरकार बनाने के लिए न्यौता दिया विश्व का प्रथम मौका था जब वामपंथी एक चुनाव के जरिये अपनी सरकार बनाने जा रहे थे ! केरल में सत्ता से बेदखल होने पर कांग्रेस पार्टी चुनाव में हुई अपनी हार को पचा नहीं पाई और एक निर्वाच ित सरकार के खिलाफ मुक्ति आन्दोलन छेड़ दिया ! अब तक अँगरेज़ मुक्त भारत के लिए कांग्रेस आन्दोलन कर रही थी ! परन्तु जब इससे भी मन नहीं भरा तो नेहरु सरकार ने १९५९ में आजाद भारत की पहली गैर कांग्रेसी सरकार को अनुच्छेद ३५६ के तहत बर्खास्त कर दिया जो आगे चलकर सभी के लिए सरकारे हटाने का एक औजार बन गया ! २०१४ में एक बार फिर पूर्ण गैर कांग्रेसी सरकार बन गयी तो १९५७ की कहानी दोहराई गयी इस बार इस षड्यंत्र में लेखक , पत्रकार , नेता , धार्मिक नेता , वकील , जज सभी शामिल रहे !! इन सबकी अगुयाई कांग्रेस के अध्यक्ष महोदय कर...
पाखंडी हिन्दू नेता भाग -१ लेखक :- योगी त्यागी   ट्विटर पर आप पार्टी के सुप्रीमो अरविन्द केजरीवाल ने एक ट्वीट किया जिसमे झाड़ू एक स्वस्तिक चिह्न के पीछे भाग रही थी ! इसका शीर्षक था “किसी ने मुझे भेजा”! उन्नीसवी शताब्दी में ये हिटलर का भी चुनावी चिह्न था दूसरी तरफ ये वैदिक काल में आर्यों का पवित्र चिह्न भी था! इस ट्वीट में केजरीवाल दो सन्देश देना चाहते थे की उनकी पार्टी फासिस्ट विचारो को भागने में विश्वास रखती है वही दूसरी तरफ इससे चुनावो में मुस्लिम वोटो को भी साधना चाहती थी की देखो हम ही एक ऐसी पार्टी है जो इस्लाम को सपोर्ट कर सकती है चाहे इसके लिए हिन्दुओ के प्रतिको का ही अपमान क्यों न करना पड़े! आज देश संक्रमण काल से गुजर रहा है जहा हर कोई विचलित है, असंतोष से भरा हुआ है, संशय से आच्छादित है नेता और जनता दोनों ही तथ्यों से परे है ! नेता कथाये बनाने में विश्वास कर रहे है जनता उन पर विश्वास भी कर रही है ! सच्चाई को एक अलग ही चेहरा दिया जा रहा है एक ऐसा चेहरा जिसके कई आवरण है ! सत्य कही गहराई में छिपाया जा रहा है ! भारत में में नेता अवसर के अनुसार देश को दो भागो में बाटते ह...
विवेकानंद ने जीवन में सुरक्षित राह पर चलने की नहीं बल्कि जोखिम उठाने की सीख दी।  क्योंकि उनका मानना था कि अगर आप जीते तो आप संचालन करेंगे और अगर हारे तो मार्गदर्शन।