स्वतंत्र भारत में कांग्रेस का प्रथम “सरकार हटाओ आन्दोलन”


१९५७ में केरल में विधान सभा के चुनाव हुए थे जिसमे कम्युनिस्ट पार्टी को १२६ में से ६० सीट हासिल हुई थी! इनको पांच स्वतंत्र विधायको का समर्थन प्राप्त था ! राज्यपाल ने कम्युनिस्ट दल के नेता ई एम् एस नम्बुदरीपाद को सरकार बनाने के लिए न्यौता दिया विश्व का प्रथम मौका था जब वामपंथी एक चुनाव के जरिये अपनी सरकार बनाने जा रहे थे !
केरल में सत्ता से बेदखल होने पर कांग्रेस पार्टी चुनाव में हुई अपनी हार को पचा नहीं पाई और एक निर्वाचित सरकार के खिलाफ मुक्ति आन्दोलन छेड़ दिया ! अब तक अँगरेज़ मुक्त भारत के लिए कांग्रेस आन्दोलन कर रही थी ! परन्तु जब इससे भी मन नहीं भरा तो नेहरु सरकार ने १९५९ में आजाद भारत की पहली गैर कांग्रेसी सरकार को अनुच्छेद ३५६ के तहत बर्खास्त कर दिया जो आगे चलकर सभी के लिए सरकारे हटाने का एक औजार बन गया !
२०१४ में एक बार फिर पूर्ण गैर कांग्रेसी सरकार बन गयी तो १९५७ की कहानी दोहराई गयी इस बार इस षड्यंत्र में लेखक , पत्रकार , नेता , धार्मिक नेता , वकील , जज सभी शामिल रहे !! इन सबकी अगुयाई कांग्रेस के अध्यक्ष महोदय कर रहे थे जिनके पड्नाना को महारत हासिल थी !!

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